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आचार्य शिवपूजन सहाय की साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी : प्रो. कृष्णा कान्त सिंह


बक्सर । हिंदी साहित्य के महान साहित्यकार एवं साहित्यिक पत्रकार आचार्य शिवपूजन सहाय की स्मृति में उनके पैतृक गांव उनवांस में आचार्य शिवपूजन सहाय स्मृति पर्व समारोह का आयोजन किया गया। ‘स्त्री दर्पण’, नई दिल्ली के श्री विमल कुमार के संयोजन में आयोजित समारोह में साहित्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में आचार्य शिवपूजन सहाय के जीवन, साहित्यिक कृतित्व और हिंदी नवजागरण में उनके योगदान पर गंभीर विमर्श हुआ।

समारोह के मुख्य अतिथि महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय, बक्सर के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) कृष्णा कान्त सिंह रहे। मुख्य वक्ता स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार चौधरी ने आचार्य शिवपूजन सहाय के जीवन, साहित्य और साहित्यिक पत्रकारिता में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि डॉ. वैरागी प्रभाष कुमार चतुर्वेदी, उनवांस के मुखिया सहित साहित्य प्रेमी, शिक्षाविद, ग्रामीण और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।





कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य शिवपूजन सहाय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि और माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुआ। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का विधिवत उद्घाटन किया गया। बच्चों ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया। अतिथियों एवं वक्ताओं को अंगवस्त्र और बुके भेंटकर सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) कृष्णा कान्त सिंह ने कहा कि आचार्य शिवपूजन सहाय हिंदी साहित्य के ऐसे युगपुरुष थे, जिन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से हिंदी भाषा और साहित्य को समृद्ध करने के साथ हिंदी नवजागरण को भी नई दिशा दी। उनका साहित्य भारतीय समाज, लोकजीवन और मानवीय संवेदनाओं से गहरे रूप से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आचार्य शिवपूजन सहाय की समृद्ध साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

मुख्य वक्ता डॉ. पंकज कुमार चौधरी ने कहा कि हिंदी भाषा के विकास, साहित्यिक पत्रकारिता और हिंदी नवजागरण के क्षेत्र में आचार्य शिवपूजन सहाय का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनका व्यक्तित्व केवल साहित्यकार तक सीमित नहीं था, बल्कि वे कुशल संपादक और गंभीर समाजचिंतक भी थे। उनकी रचनाओं में तत्कालीन समाज, लोकजीवन और जनभावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।





समारोह के दौरान हिंदी साहित्य, हिंदी भाषा और हिंदी नवजागरण के विभिन्न पक्षों पर सार्थक एवं गंभीर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आचार्य शिवपूजन सहाय के पैतृक गांव में उनकी स्मृति में इस प्रकार का आयोजन उनकी साहित्यिक विरासत को जीवंत रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपने साहित्यिक पुरखों और उनकी रचनात्मक परंपरा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय, बक्सर के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. नवीन शंकर पाठक ने किया। उन्होंने समारोह में उपस्थित अतिथियों, वक्ताओं, साहित्य प्रेमियों और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आचार्य शिवपूजन सहाय की स्मृति में आयोजित यह समारोह साहित्य और समाज के बीच संवाद को मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर है।








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