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कोविड संक्रमण से बचना है तो अनिवार्य रूप से ससमय ले टीका : डॉ. नरेश- doctor-naresh





• कोविड संक्रमण के लक्षण दिखने पर 6 'एम' के नियमों का सख्ती से करें पालन
• लक्षण दिखने पर तत्काल सपरिवार कराएं कोविड की जांच

(बक्सर ऑनलाइन न्यूज़):- जिले में एक बार फिर कोरोना विस्फोट हुआ है। बीते मंगलवार को एक ही दिन में 61 लोगों की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सख्ते में है। ऐसे में लोगों को अनिवार्य रूप से वैक्सीन लेने के साथ मास्क पहनने और शारीरिक दूरी का पालन करने की सलाह दी जा रही है। वहीं, जिले में स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मियों के साथ फ्रंट लाइन वर्कर्स को प्रीकॉशनरी डोज देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस क्रम में जिला यक्ष्मा पदाधिकारी सह सीडीओ डॉ. नरेश कुमार ने भी बुधवार को वैक्सीन की तीसरी डोज ली। डॉ. नरेश कुमार ने जिले में बढ़ती कोरोना मरीजों की संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए सभी स्वास्थ्य कर्मियों व फ्रंट लाइन वर्कर्स से ससमय प्रीकॉशनरी डोज लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिले में कोरोना संक्रमण के खिलाफ लड़ाई में स्वास्थ्य कर्मियों और एफएलडब्लू ही सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसलिए सबसे पहले इनकी सुरक्षा जरूरी है। ताकि, वो लोगों कोरोना के खिलाफ जंग में जिलेवासियों को जागरूक कर सकें। 
लक्षण दिखें तो कराएं जांच और खुद को करें आइसोलेट :
डॉ. नरेश कुमार ने बताया, फिलवक्त कोरोना के कई वैरिएंट आ चुके हैं। जिनके लक्षण कमोवेश समान ही है। लेकिन, सबके प्रभाव अलग अलग है। बिना जांच के यह स्पष्ट नहीं किया जा सकता है कि कौन सा मरीज किस वैरिएंट से संक्रमित है। इसलिए बीमारी की गम्भीरता को देखते हुए लोगों को जांच के प्रति भी जागरूक होना होगा। यदि, किसी व्यक्ति में कोरोना के लक्षण दिखे तो, उन्हें अनिवार्य रूप से जांच करानी चाहिए। उन्होंने बताया, कई बार कोविड संक्रमण के लक्षण दिखने पर भी जांच रिपोर्ट निगेटिव आती है। कई बार रिपोर्ट देर से भी आती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं हुआ कि सुरक्षा के पैमाना को नजरअंदाज कर दिया जाये। ऐसे समय में व्यक्ति दवारा स्वयं आइसोलेट हो जाना चाहिए। यह उसके खुद व परिवार व समाज के अन्य सदस्यों की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है।
सिक्स एम के नियम का करें पालनः
डॉ. नरेश कुमार ने बताया, कोविड संक्रमण काल में सिक्स एम के नियम का पालन किया जाना चाहिए। इनमें पहला एम मिक्सिंग है यानि कोविड लक्षण वाले लोगों को परिवार या लोगों में मिक्स नहीं करना है और मिलने जुलने से पूरी तरह बचना है। दूसरा एम मेडिसिन है यानि लक्षण दिखने के साथ ही आवश्यक मेडिसिन की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग दवारा उपलब्ध करायी जा रही टेलीमेडिसिन सुविधा से प्राप्त करना है। तीसरा एम मील है यानी बेहतर खानपान का ध्यान रखना है। चौथा एम माइंडसेट है यानि पॉजिटिव रहना है और नर्वस नहीं होना है। नर्वस होने से एड्रेलिन हार्मोन निकलता है और यह स्वास्थ्य की स्थिति को खराब करता है। पांचवा एम मूवमेंट हैं यानि ऑक्सीजन लेवल कम होने पर तुरंत अस्पताल जाना है और छठा एम मॉनिटरिंग है यानि इस दौरान अपने शरीर के तापमान, रक्तचाप और ऑक्सिजन स्तर की नियमित निगरानी करते रहना है।


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