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भोजपुर जिला में 14,86,384 बच्चों को खिलायी जायेगी कृमि मुक्ति की दवा




- सात नवंबर को एक से 19 साल तक के बच्चों को खिलाई जाएगी अल्बेंडाजोल की गोली
- प्रखंडों में शुरू होगा योजना का प्रचार प्रसार, 11 नवंबर को चलेगा मॉप अप राउंड

आरा | बदलते मौसम में बच्चों का बीमार होना लाजिमी है। लेकिन, कुछ बीमारियां ऐसी हैं, जो परजीवियों के कारण बच्चों को हो जाती हैं। जिससे बच्चों और किशोर-किशोरियों को बचाने के लिए जिले में सात नवंबर को कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा। जिसके तहत एक से 19 साल तक के बच्चों को अल्बेंडाजोल की गोली खिलाई जाएगी। वहीं, इस अभियान में छूटे हुए बच्चों को दवा खिलाने के लिए 11 नवंबर को मॉप अप राउंड चलाया जाएगा। ताकि, जिले का कोई भी बच्चा दवा खाने से वंचित न रहे। जिला स्तर पर इसके लिए 14,86,384 बच्चों को कृमि मुक्ति की दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसके लिए जिला व प्रखंड स्तर पर टास्क फोर्स की बैठक कर अभियान को सफल बनाने की रणनीति तय की जाएगी।
कृमि से बचाने के लिए बच्चों को साल में दो बार खिलानी चाहिए दवा :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. संजय कुमार सिन्हा ने बताया, भोजपुर जिले में मिट्टी, पानी व वातावरण के कारण बच्चे और बड़े दोनों में हुकवर्म, टैप वर्म व अन्य प्रकार के कृमि से ग्रसित हो सकते हैं। बच्चों को इनसे बचाव के लिए साल में दो बार कृमि की दवा खिलानी चाहिए, ताकि उनकी सेहत अच्छी रह सके एवं बच्चे स्वस्थ व तंदुरुस्त दिखें। उन्होंने बताया कि स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रो में बच्चों को एक अल्बेंडाजोल की टेबलेट खिलाई जाएगी। इसके लिए आईसीडीएस व शिक्षा विभाग से समन्वय स्थापित किया गया है। ताकि, सभी लक्षित बच्चों को दवाओं का सेवन कराया जा सके। वैसे बच्चे और किशोर जो स्कूल नहीं जाते हैं उनपर भी विशेष फोकस किया जाएगा। कृमि के कारण बच्चों को पढ़ने में मन नहीं लगता है और खाने में रूचि घटने लगती है। अल्बेंडाजोल की गोली खिलाने से बच्चे एनीमिया के शिकार होने से बच सकते हैं।
विभिन्न माध्यमों से कराया जाएगा प्रचार प्रसार :
डॉ. सिन्हा ने बताया, पेट में कृमि होने से बच्चों को कई तरह की समस्या हो सकती है। ऐसे लक्षण के प्रति माता-पिता को जागरूक रहना चाहिए। अभियान की सफलता को लेकर सभी सरकारी विद्यालयों एवं ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पोस्टर, बैनर, पंपलेट और माइकिंग आदि के माध्यम से प्रचार प्रसार कराया जाएगा। जिससे कोई भी बच्चा यह दवाई खाने से छूट ना पाए। अभियान को लेकर माइक्रोप्लान तैयार किया जाएगा। उसी के हिसाब से बच्चों को अल्बेंडाजोल की गोली खिलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि दवा खाने के बाद उल्टी या मिचली महसूस होती है तो घबराने की जरूरत नहीं है। पेट में कीड़े ज्यादा होने पर दवा खाने के बाद सिरदर्द, उल्टी, मिचली, थकान होना या चक्कर आना महसूस होना एक सामान्य प्रक्रिया है। दवा खाने के थोड़ी देर बाद सब ठीक हो जाता है।





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