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विश्व पुस्तक मेला (दिल्ली) में बक्सर के लेखक रोहित दुबे की ‘लेटर टू माई सन’ का लोकार्पण, भारत मंडपम में नामचीन हस्तियों संग मंच साझा कर जिले को किया गौरवान्वित


बक्सर । देश की राजधानी नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में आयोजित विश्व पुस्तक मेला में साहित्य और जीवन अनुभवों से जुड़ा एक विशेष आयोजन देखने को मिला। नगर के चरित्रवन स्थित श्रीकृष्ण नगर कॉलोनी निवासी लेखक रोहित दुबे की नॉन-फिक्शन पुस्तक ‘लेटर टू माई सन’ के विमोचन अवसर पर पाठकों और साहित्य प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। यह पुस्तक प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई है। पुस्तक का औपचारिक लोकार्पण सोमवार, 12 जनवरी 2026 को हॉल संख्या–5 स्थित प्रभात प्रकाशन के स्टॉल संख्या बी–2 पर दोपहर 1.00 बजे से किया जाएगा।

यह पुस्तक एक पिता द्वारा अपने पुत्र के नाम लिखे गए पत्रों के रूप में प्रस्तुत है, जिसमें लेखक ने अपने वास्तविक जीवन के संघर्षों, असफलताओं, अनुभवों और उनसे मिली सीख को सरल, भावनात्मक और प्रेरक शैली में अभिव्यक्त किया है। पुस्तक का मूल भाव संघर्ष से आत्मबल और सशक्त सोच की ओर की यात्रा है, जो पाठकों को कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देती है।


पुस्तक विमोचन से पूर्व विश्व पुस्तक मेला के अंतर्गत 11 जनवरी को एक विशेष पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। यह परिचर्चा ऑथर्स कॉर्नर, हॉल संख्या–5 में शाम 4.00 बजे से 4.45 बजे तक संपन्न हुई। चर्चा का विषय था—वास्तविक जीवन की चुनौतियों को किस प्रकार प्रेरक कथाओं और लेखन के माध्यम से समाज के सामने प्रस्तुत किया जा सकता है।

पैनल चर्चा का संचालन रोहिणी वैष्णवे ने किया। इसमें राजानी कफालिया, लेखक रोहित दुबे, प्रबीर घोष और सचिन जैन बतौर पैनलिस्ट शामिल हुए। बक्सर के युवा लेखक रोहित दुबे ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जीवन के संघर्ष जब शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त होते हैं, तो वे न केवल व्यक्तिगत अनुभव रह जाते हैं, बल्कि समाज के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा का स्रोत बन जाते हैं।
प्रभात प्रकाशन की ओर से इस अवसर पर पाठकों, लेखकों और मीडिया प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया। आयोजकों के अनुसार ‘लेटर टू माई सन’ युवाओं के साथ-साथ अभिभावकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण पुस्तक है, जो जीवन के कठिन दौर में सही दिशा, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित करने में सहायक सिद्ध होगी।

विश्व पुस्तक मेला में आयोजित यह कार्यक्रम साहित्य, अनुभव और प्रेरणा के संगम के रूप में यादगार रहा, जहां लेखन के माध्यम से जीवन को समझने और संवारने का सार्थक संदेश दिया गया।







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