बक्सर । बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अब इतिहास बन चुका है। वोटों की गिनती खत्म, नतीजे घोषित और जीत-हार की तस्वीर साफ हो चुकी है। लेकिन चुनावी मौसम में गूंजने वाले कुछ गाने और नारे अब भी लोगों के जेहन में अटके हुए हैं—खासतौर पर सनातन वाले गाने।
चुनाव से पहले बक्सर सदर सीट पर टिकट की दौड़ कुछ ऐसी थी मानो टिकट नहीं, बल्कि कुंभ का अमृत बंटने वाला हो। कोई खुद को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का खास बता रहा था, तो कोई वर्षों की निष्ठा और पुराने झंडे गिनाते नहीं थक रहा था। इसी टिकटार्थी भीड़ में कुछ ऐसे भी चेहरे उभरे, जो अचानक सनातन धर्म के सबसे बड़े रक्षक बनकर सामने आए।
चुनावी प्रचार गाड़ियों पर दिन-रात सनातन के गीत बजाए गए। ऐसा लग रहा था मानो चुनाव नहीं, बल्कि धार्मिक संगीत प्रतियोगिता चल रही हो। ढोल, डीजे और स्पीकर से निकलते गीतों से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि टिकट उसी को मिलनी चाहिए, जो सबसे ऊंचे सुर में सनातन गा सके।
लेकिन राजनीति की स्क्रिप्ट हमेशा गानों से नहीं, गणित से लिखी जाती है। अंततः भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व आईपीएस आनंद मिश्रा को बक्सर सदर सीट से टिकट दिया और जनता ने भी भारी बहुमत से उन्हें विधायक चुन लिया। नतीजा आते ही प्रचार गाड़ियों के स्पीकर अचानक शांत हो गए और सनातन के गीतों पर मानो चुनावी ब्रेक लग गया।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जो गाने टिकट के लिए दिन-रात बजाए जा रहे थे, वे चुनाव के बाद कहां गायब हो गए? क्या सनातन सिर्फ टिकट तक ही सीमित था? या फिर बिना माइक, बिना डीजे और बिना चुनाव के उसे सुनने वाला कोई नहीं बचा?
बक्सर की गलियों में अब चर्चा है कि अगला चुनाव आते ही वही गाने फिर से नए रीमिक्स में सुनाई देंगे। फिलहाल तो चुनाव बीत गया है, विधायक बन गए हैं, और सनातन का गाना… शायद अगली टिकट दौड़ तक के लिए आराम फरमा रहा है।
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