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राज्य के 24 जिलों में 10 फ़रवरी को एमडीए राउंड का होगा मेगा लॉन्च: डॉ. परमेश्वर प्रसाद



आईएमए के साथ एमडीए- फाइलेरिया के मेगा लांच को लेकर संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित
फाइलेरिया नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डीजीज में एक प्रमुख रोग 
विश्व के 72 देशों में लगभग 86 करोड़ आबादी फाइलेरिया के खतरे में 
देश के कुल फाइलेरिया मरीजों का 18% केवल बिहार में 
पटना: वर्ष 2030 तक फाइलेरिया उन्मूलन के लिए देश में अब एक साथ एमडीए यानी सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा. राज्य के 24 जिलों में 10 फरवरी को एमडीए का मेगा लॉन्च किया जाएगा. जिसमें 16 जिलों में 2 दवाएं एवं शेष 8 जिलों में तीन तरह की दवाएं घर-घर जाकर लोगों को खिलाई जाएगी. उक्त बातें अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम अधिकारी, फाइलेरिया, डॉ. परमेश्वर प्रसाद ने आईएमए के साथ एमडीए- फाइलेरिया के मेगा लांच को लेकर आयोजित संवेदीकरण कार्यशाला के दौरान कही. डॉ. प्रसाद ने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन में आईएमए ने पहले भी सहयोग किया है. उन्होंने आईएमए से पुनः एमडीए में अधिक से अधिक लोगों द्वारा दवा सेवन करने के लिए सहयोग प्रदान करने की बात कही.  
देश के कुल फाइलेरिया मरीजों का 18% केवल बिहार में: 
डॉ. प्रसाद ने बताया कि देश में कुल 7 लाख 6 हजार फाइलेरिया के मरीज हैं. जिसमें 18% मरीज केवल बिहार में है. उन्होंने बताया कि देश में कुल 328 जिले फाइलेरिया की जद में है. इनमें 75 फीसदी जिले केवल पाँच राज्यों यानी बिहार, झारखंड, उड़ीसा, उत्तरप्रदेश एवं छतीसगढ़ में हैं. उन्होंने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन में एमडीए एवं एमएमडीपी (रुग्णता प्रबंधन एवं विकलांगता रोकथाम) की भूमिका सबसे अहम होती है. एमडीए की सहायता से रोग की रोकथाम एवं एमएमडीपी की सहायता से हाथीपांव का प्रबंधन किया जाता है. उन्होंने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य में प्रखंड स्तर पर फाइलेरिया क्लिनिक स्थापित किए जा रहे हैं. बिहार के सीतामढ़ी एवं मुजफ्फरपुर के सभी प्रखंडों में फाइलेरिया क्लिनिक की स्थापना हो चुकी है.
विश्व के 72 देशों में लगभग 86 करोड़ आबादी फाइलेरिया के खतरे में 
विश्व स्वास्थ्य संगठन के नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीज के कोऑर्डिनेटर डॉ. राजेश पांडेय ने बताया कि फाइलेरिया नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डीजीज में एक प्रमुख रोग है. विश्व के 72 देशों में 85.9 करोड़ आबादी फाइलेरिया के खतरे में हैं. विश्व भर में फाइलेरिया विकलांगता का दूसरा प्रमुख कारण है. इससे विश्व भर में लगभग 200 करोड़ रूपये की आर्थिक क्षति होती है. उन्होंने बताया कि एन टी डी जिसमे फ़ाइलेरिया भी शामिल है के  उन्मूलन पर खर्च किए गए प्रति 1 डॉलर पर 25 डॉलर का फायदा होगा. डॉ. पांडेय ने बताया कि फाइलेरिया प्रबंधन एवं उन्मूलन की दिशा में मरीजों को न्यूनतम पैकेज ऑफ़ केयर प्रदान करने पर जोर दिया जा रहा है. जिसमें फाइलेरिया संक्रमण का उपचार, एक्यूट अटैक का उपचार, हाथीपांव का प्रबंधन एवं हाइड्रोसील का सर्जरी शामिल है. इस दौरान उन्होंने फाइलेरिया प्रसार, फाइलेरिया उन्मूलन रणनीति, एमडीए, एमएमडीपी सहित हाथीपांव के चरणों के विषय में विस्तार से जानकारी दी. 
आईएमए के सदस्य एमडीए-फाइलेरिया में करेंगे सहयोग :  
आईएमए के राज्य सचिव डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि’ आईएमए के सभी सदस्यों के साथ मिलकर फाइलेरिया उन्मूलन में सहयोग करने की कार्ययोजना बनायेंगे. साथ ही आईएमए के सभी चिकित्सकों के माध्यम से यह सुनिश्चित कराएंगे कि सभी डॉक्टर अपने पर्चे पर एमडीए का मोहर लगे. 
केयर के टेक्निकल एक्सपर्ट डॉ. इंद्रनाथ बनर्जी ने आईएमए के सदस्यों से रोग की पहचान, प्रबंधन एवं उपचार के साथ फाइलेरिया उन्मूलन के कार्यक्रम जैसे एमडीए एवं नाईट ब्लड सर्वे में सहयोग करने की बात कही. 
इस दौरान वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. विनय कुमार, आरएचओ डॉ. रवि शंकर, पटना के सिविल सर्जन, आईएमए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. सचिदानंद कुमार, एवं राज्य सचिव डॉ. अशोक कुमार, पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. कैप्टेन वी एस सिंह के साथ केयर के टेक्निकल एक्सपर्ट डॉ. इंद्रनाथ बनर्जी एवं स्टेट प्रोजेक्ट मेनेजर बसब रूज एवं फाइलेरिया के राज्य सलाहकार डॉ. अनुज सिंह रावत ने भाग लिया. साथ ही इस दौरान पीसीआई, केयर, सीफ़ार, लेप्रा, जीएचएस एवं डब्लूएचओ के अधिकारी सहित आईएमए के अन्य चिकित्सक भी उपस्थित थे.



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