- ब्रह्मपुर धाम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में साहित्यकारों ने याद किया योगदान
बक्सर । राष्ट्रीय कवि संगम के यशस्वी राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वर्गीय जगदीश मित्तल की पावन स्मृति में रविवार को ब्रह्मपुर धाम स्थित गौरीशंकर पब्लिक स्कूल परिसर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय कवि संगम के जिला अध्यक्ष रतनेश ओझा ‘राही’ ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्व. जगदीश मित्तल के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं दो मिनट का मौन रखकर किया गया। इस दौरान उपस्थित साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों एवं गणमान्य लोगों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए हिंदी साहित्य और काव्य जगत में उनके योगदान को याद किया।
मुख्य अतिथि वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति आचार्य धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि स्व. जगदीश मित्तल का निधन साहित्य और काव्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने राष्ट्रीय कवि संगम के माध्यम से देश के विभिन्न क्षेत्रों में छिपी काव्य प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया। उनका जीवन मां भारती की सेवा और हिंदी साहित्य के उत्थान के लिए समर्पित रहा।
अध्यक्षीय संबोधन में रतनेश ओझा ‘राही’ ने कहा कि स्व. मित्तल केवल एक कुशल संगठनकर्ता ही नहीं, बल्कि देशभर के कवियों के अभिभावक और मार्गदर्शक थे। साहित्य और राष्ट्र के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
इस अवसर पर भोजपुर विभाग के सेवा प्रमुख शिवजी पाण्डेय, दक्षिण दिल्ली के पूर्णकालिक धर्म जागरण समन्वयक जितेंद्र तिवारी तथा सतेंद्र मिश्र ने भी स्व. मित्तल के सांगठनिक कौशल, साहित्यिक योगदान और राष्ट्र-निर्माण संबंधी विचारों को याद किया।
श्रद्धांजलि सभा में कवियों ने काव्य-पुष्पांजलि भी अर्पित की। प्रख्यात कवि सतेंद्र पाठक ‘बवाली’ एवं साहित्यकार रामनिवास वर्मा ‘शिशिर’ ने अपनी मर्मस्पर्शी एवं संस्मरणात्मक रचनाओं के माध्यम से स्व. मित्तल को श्रद्धांजलि दी, जिससे सभा का वातावरण भावुक हो उठा।
मौके पर तुलसी विचार मंच के संयोजक शैलेश कुमार ओझा, पर्यावरण कार्यकर्ता नित्यानंद ओझा, प्रदीप दुबे सहित स्थानीय प्रबुद्ध नागरिक, शिक्षाविद और बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने स्व. जगदीश मित्तल के अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाने तथा राष्ट्रीय कवि संगम के मूल सिद्धांतों और साहित्यिक मूल्यों को अक्षुण्ण रखने का संकल्प लिया। अंत में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई।
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