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मुख्यमंत्री के बक्सर दौरे से पहले बड़ी कार्रवाई: नाबालिग छात्राओं से जुड़े मामले में कुकर्म के दोनों आरोपी शिक्षक बर्खास्त



- बीरेंद्र प्रसाद और अरविंद कुमार की सरकारी सेवा खत्म, नियम 14(XI) के तहत अब भविष्य में सरकारी नौकरी के लिए भी नहीं होंगे पात्र

बक्सर । नथुनी अहीर के डेरा स्थित मध्य विद्यालय में नाबालिग छात्राओं से जुड़े कथित यौन शोषण के मामले में शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी शिक्षक बीरेंद्र प्रसाद और अरविंद कुमार को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभागीय कार्रवाई के बाद दोनों की नौकरी चली गई है और नियम 14(XI) के तहत भविष्य में सरकारी सेवा के लिए उनकी पात्रता भी समाप्त हो जाएगी। ताजा कार्रवाई की पुष्टि सोमवार को प्रकाशित रिपोर्ट में भी हुई है।

यह कार्रवाई ऐसे वक्त हुई है, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बक्सर दौरे से पहले जिले में इस चर्चित मामले को लेकर प्रशासनिक और विभागीय कार्रवाई पर निगाहें टिकी हुई थीं। घटना सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने दोनों शिक्षकों को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की थी। अब जांच पूरी होने के बाद बर्खास्तगी तक कार्रवाई पहुंच गई है।


शिकायत से गिरफ्तारी और अब बर्खास्तगी तक पहुंचा मामला :

नथुनी अहीर के डेरा मध्य विद्यालय से जुड़े मामले में आरोप सामने आने के बाद शिकायत, पुलिस कार्रवाई और विभागीय जांच का सिलसिला शुरू हुआ। शिकायत में छात्राओं से कथित आपत्तिजनक व्यवहार, वीडियो बनाए जाने और वायरल होने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। अरविंद कुमार और बीरेंद्र प्रसाद के खिलाफ शिक्षा विभाग ने 2 सितंबर को निलंबन की कार्रवाई की थी और अगले दिन विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद कार्रवाई और तेज हुई। पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की और आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी। पुलिस की कार्रवाई में प्रधानाध्यापक समेत अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी हुई और बाद में फरार चल रहे बीरेंद्र प्रसाद को भी गिरफ्तार किया गया।

जेल से आया स्पष्टीकरण, विभाग ने नहीं माना संतोषजनक :

घटना के बाद जिला पदाधिकारी साहिला के निर्देश पर विशेष टीम गठित कर विभागीय जांच कराई गई। विभाग ने जेल में बंद दोनों आरोपी शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा। जेलर के माध्यम से जांच अधिकारियों तक दोनों के स्पष्टीकरण पहुंचाए गए, लेकिन विभाग ने उसे संतोषजनक नहीं माना।

इसके बाद विभाग ने दोनों शिक्षकों को सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया। विभागीय कार्रवाई के तहत जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, माध्यमिक शिक्षा को उपस्थापन पदाधिकारी बनाया गया, जबकि जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान को संचालन पदाधिकारी बनाया गया।



नियम 14(XI) के तहत नौकरी खत्म, आगे भी सरकारी सेवा का रास्ता बंद :

दोनों शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14(XI) के तहत की गई है। विभागीय कार्रवाई के बाद अब दोनों की सरकारी सेवा समाप्त हो गई है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रावधान के तहत वे भविष्य में किसी सरकारी नौकरी के लिए भी पात्र नहीं होंगे।

इस पूरे घटनाक्रम ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षकों की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शिक्षा विभाग ने भी मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।

अब इस मामले में विभागीय कार्रवाई का एक बड़ा अध्याय पूरा हो गया है, जबकि आपराधिक मामले में न्यायिक प्रक्रिया अपनी गति से आगे बढ़ रही है।








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