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पिता का सपना आंखों में, मां की दुआओं का साथ... मनोहरपुर के अंशुमान ने कुश्ती में रचा इतिहास, अब थाईलैंड की बारी


सासाराम। गांव की मिट्टी में पला-बढ़ा एक युवा जब अखाड़े में उतरता है तो उसके साथ सिर्फ उसका जुनून नहीं, बल्कि परिवार की उम्मीदें और सपने भी होते हैं। रोहतास जिले के दिनारा प्रखंड के मनोहरपुर गांव निवासी अंशुमान तिवारी ने कुश्ती के अखाड़े में अपने दमदार प्रदर्शन से राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल कर यह साबित कर दिया है कि हौसला और मेहनत के आगे संसाधनों की कमी भी छोटी पड़ जाती है। अब यही युवा पहलवान अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने की तैयारी में है। अगले महीने थाईलैंड में होने वाली वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में अंशुमान भारत और बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगे।

राष्ट्रीय चैंपियनशिप में बिहार की ओर से उतरे अंशुमान ने एक के बाद एक मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया। कड़े मुकाबलों के बीच उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों को मात देकर गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। उनकी इस सफलता की खबर जैसे ही गांव पहुंची, मनोहरपुर में खुशी की लहर दौड़ गई।





आसान नहीं था सफर, संघर्षों के बीच कायम रखा लक्ष्य

अंशुमान के चाचा बुचुल तिवारी के अनुसार, कुश्ती के प्रति अंशुमान की लगन शुरू से ही मजबूत रही है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने नियमित अभ्यास और कड़ी मेहनत को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए रखा। राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड जीतना इसी लंबे संघर्ष और समर्पण का परिणाम है। अंशुमान के दादा स्व. हरिजी तिवारी सूर्यपुरा हाईस्कूल के पूर्व प्रधानाध्यापक रहे । 

अंशुमान के पिता स्वर्गीय अखिलेश्वर तिवारी अब इस दुनिया में नहीं हैं। पिता के निधन के बाद परिवार के सामने कई मुश्किलें आईं, लेकिन अंशुमान ने परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेके। उन्होंने अपने लक्ष्य को ही अपनी ताकत बनाया और मेहनत जारी रखी।

मां ने बढ़ाया हौसला, बेटे ने किया नाम रोशन

अंशुमान की मां आरती तिवारी ने कठिन दौर में बेटे का हौसला बनाए रखा। बेटे की सफलता पर आज मां के चेहरे पर गर्व है। राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतने के बाद परिवार को अब उम्मीद है कि अंशुमान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी सफलता की कहानी दोहराएंगे।





गांव से विश्व मंच तक का सफर

अंशुमान की उपलब्धि सिर्फ उनके परिवार की खुशी नहीं है, बल्कि मनोहरपुर और पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने के बाद अब थाईलैंड में होने वाली वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में उनका चयन उनके बढ़ते कद को दर्शाता है।

अंशुमान ने अपनी सफलता से गांव के दूसरे युवाओं को भी संदेश दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे तो गांव की पगडंडी से निकलकर भी दुनिया के बड़े मंच तक पहुंचा जा सकता है।

अब निगाहें थाईलैंड पर हैं। राष्ट्रीय अखाड़े में तिरंगा ऊंचा करने के बाद अंशुमान अंतरराष्ट्रीय कुश्ती के अखाड़े में उतरेंगे। परिवार, गांव और बिहार को उम्मीद है कि वहां भी उनका दमदार प्रदर्शन जारी रहेगा और वह देश के लिए बड़ा पदक हासिल करेंगे।








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